Sunday, 23 February 2014

अज़मे सफ़र सरों पे उठाना है दूर तक


अज़मे सफ़र सरों पे उठाना है दूर तक
ले ज़िन्दगी को साथ में जाना है दूर तक

परछाइयां भी छोड़ गयी साथ अब मेरा
पर ग़म को मेरा साथ निभाना है दूर तक

जी भर के ज़िन्दगी से करें प्यार कैसे हम
आहो व आंसुओं का ख़ज़ाना है दूर तक

जिस राह पे खड़ी थीं हवाएं वो सिरफिरी
उस राह पे चराग जलाना है दूर तक

ये जिन्दगी नहीं है वफाओं का सिलसिला,
सांसों के टूटने का फसाना है दूर तक

आता नहीं करार दिले बेकरार को
बेचैनियों को अपनी भुलाना है दूर तक


©हिमकर श्याम


(चित्र गूगल से साभार) 

अज़मे सफ़र : सफ़र का संकल्प 

Sunday, 9 February 2014

चाँदनी

(चित्र गूगल से साभार)

चाँदनी  
सूने आंगन में
लिख देती है
तुम्हारा नाम

अक्सर
तमाम रात
हंसती है
बावरी चाँदनी
बात-बेबात
देती है
यह संदेशा
बार-बार
कि तुम हो
मेरे आसपास

तुम्हारे-
वजूद की खुशबू
तैरने लगती है
अंधेरे कमरे में
हंस उठते हैं
सारे पल उदास
कितना खुशनुमा
होता है
तुम्हारे होने का
फकत अहसास

छा जाता है
अंर्तमन में
उमंग-उल्लास
भूल जाता हूं
सारे विरह ताप
बैचेनियों को
मिल जाता है
अल्प विराम
तुम्हारे नाम के
चंद हर्फ़ों में
छिपा हो जैसे
जीने का पैगाम

जानता हूं -
कि रह जाना है
फिर खाली हाथ
अब चाहे यह
भ्रम हो या विश्वास
या ठगती हो
बावरी चाँदनी  
हर रोज, हर बार
जो कुछ भी हो
सहर्ष सब स्वीकार।

© हिमकर श्याम








Sunday, 2 February 2014

वो चेहरा नजर आएगा













आपके बीते हुए कल में
एक नाम मेरा भी था
खंगालिए, यादों को जरा
वो चेहरा नजर आएगा


जीवन की आपाधापी में
बिखर गयीं सारी कड़ियां
खोलिए, अतीत के द्वार
गुजरा दौर नजर आएगा

वहीं सूरत, वहीं सोच
वहीं खूबियां हैं रगो में
झांकिए, दिल में एक बार
वहीं दोस्त नजर आएगा

© हिमकर श्याम
(चित्र गूगल से साभार)