Friday, 22 April 2022

हरी भरी धरती रहे

 


संकट सिर पर है खड़ा, रहिए ज़रा सतर्क।

बचा हुआ है अब कहाँ, मिट्टी से सम्पर्क।।


हरियाली पानी हवा, पृथ्वी के उपहार।

हर प्राणी के वास्ते, जीवन का आधार।।


कंकरीट से हम घिरे, होगा कब अहसास।

हरी भरी धरती रहे, मिल कर करें प्रयास।।


वसुधा ने जो भी दिया, उसका नहीं विकल्प।

धरा दिवस पर कीजिए, संचय का संकल्प।।


■ हिमकर श्याम

Monday, 4 April 2022

गमक उठे हैं साल वन

 



ढाक-साल सब खिल गए, मन मोहे कचनार।

वन प्रांतर सुरभित हुए, वसुधा ज्यों गुलनार।।


गमक उठे हैं साल वन, झरते सरई फूल।

रंग-गंध आदिम लिए, मौसम है अनुकूल।।


मीन- केकड़ा का यहाँ, पुरखों जैसा मान।

दोनों  के  सहयोग  से,  पृथ्वी  का निर्माण।।


निखरा-निखरा रूप है, बाँटे स्नेह अथाह।

धरती दुल्हन सूर्य की, रचने को है ब्याह।।


मटके का जल देख कर, वर्षा का अनुमान।

युगों पुरानी यह प्रथा, आदिम रीति विधान।।


उत्सव का माहौल है,  शहर हो कि हो गाँव।

ढोल-  नगाड़े  बज रहे,  थिरक रहे हैं पाँव।।


■ हिमकर श्याम

Thursday, 14 October 2021

होगी कृपा अनूप

 


एक  हाथ में है कमल
,  दूजे में त्रिशूल।

शैलपुत्री के रूप में, करे कष्ट उन्मूल।।

 

है शुभ फलदायी बहुत, ब्रह्मचारिणी रूप।

मन  से करें उपासनाहोगी कृपा अनूप।।

 

स्वर्ण वर्ण दस हाथ है, शशिघंटा दुतिमान।

शिक्षा, ज्ञान प्रदायिनी, करती हैं कल्याण।।

 

अष्ट भुजा माँ भगवती, मंद मधुर मुस्कान।

कूष्मांडा ने ही किया, सकल जगत निर्माण।।

 

सेनापति बन कर लड़ी, देव असुर संग्राम।

माता सनत कुमार की, स्कंदमात है नाम।।

 

महिषासुर संहारिणी, असुरों का कर नाश।

दुख  हरती  कात्यायनी, ऐसा है विश्वास।।

 

स्वयं  शक्ति संधान से, कालरात्रि अवतार।

रौद्र रूप धर कर दिया, रक्त -बीज संहार।।

 

दया-रूप  माँ गौरि  है, हर  लेती  है पाप।

श्रद्धा भाव से पूजिए, मिट जाए संताप।।

 

अष्ट-सिद्धि नव निधि मिले, नमन करे संसार।

सिद्धि- दात्रि करती सदा, सिद्ध शक्ति संचार।।

© हिमकर श्याम

(चित्र गूगल से साभार)