Tuesday, 7 July 2015

साथ निभाया है जैसे, जन्मों तक निभाएँ

साथ निभाया है जैसे, जन्मों तक निभाएँ   
बन इक दूजे का संबल, हर ग़म को हराएँ   
पाएँ खुशियाँ ही खुशियाँ, रहे दूर बलाएँ
रहे सुवासित मन उपवन, प्रेम सुगंध लुटाएँ  
सौ शरदों तक आप जिएँ, रोग व्याधि भुलाएँ
प्रेमाशीष मिले हमको, राह हमें दिखाएँ  
पूरे हों स्वप्न सारे, हरपल मुस्कुराएँ
हम मधुर धुन उमंगों की, मिलकर गुनगुनाएँ
शादी की सालगिरह पर, हम सब की दुआएँ
स्वर्ण जयंती मनाया, हीरक भी मनाएँ।

© हिमकर श्याम

                                                                    

[ विगत 18 जून, 2015  को माँ-पापा के विवाह की 53 वीं सालगिरह थी, एक छोटी सी रचना उनके लिए. तस्वीरें परिणय की 50 वीं वर्षगाँठ की हैं. यह रचना उनको भी समर्पित जिन्होंने हाल-फिलहाल में अपने वैवाहिक जीवन के 50 साल पूरे किये हैं.]



Sunday, 21 June 2015

पिता महान

[पितृ दिवस पर]

1.
पिता का साया
तरुवर की छाया
पिता सुरक्षा

2.
ऊँगली थामे
कठिन डगर पे
राह दिखाये

3.
धीर-गंभीर
कठोर शख्सियत
कोमल दिल

4.
पिता का साथ
सुखद अहसास
पिता विश्वास

5.
जीवनदाता
सुसंस्कार सिखाता
पिता प्रेरणा

6.
बच्चों खातिर
तकलीफ़ें सहता
चैन गँवाता

7.
पिता का त्याग
वात्सल्य अनुराग
अतुलनीय

8.
पिता सहारा
शक्ति और संबल
मार्गदर्शक

9.
पिता की डांट
सख्ती अनुशासन
निश्छल प्यार

10.
सबकी इच्छा
अपना जो समझे
क्यों मोहताज़

11.
पिता महान
न भूलो अहसान
करो सम्मान

© हिमकर श्याम

(चित्र गूगल से साभार)


Saturday, 13 June 2015

ढूंढते फिर रहे सब ख़ुशी का पता


बाँधते हैं उमीदें, रखें हौसला
हमने सीखी परिंदों से ऐसी अदा

साथ लेकर इरादे सफ़र में चलो
राह रोके खड़ीं है मुखालिफ़ हवा

जिस तरफ देखिए हैं उधर ग़मज़दा
ढूंढते फिर रहे सब ख़ुशी का पता

यह तो अच्छा हुआ जो भुलाया उन्हें
उनको फुर्सत कहाँ जो रखें वास्ता

हम न समझे कभी ये सियासी जुबाँ
तर्जुमा अलहदा और बातें जुदा

मिट गयी वो बगावत की तहरीर सब
बिक गए चंद सिक्कों में जो रहनुमा

सूझता ही नहीं अब कोई रास्ता
है नज़र में मेरे बस ख़ला ही ख़ला

काम आती नहीं है दवा या दुआ
संगदिल ज़िंदगी पर अभी आसरा

© हिमकर श्याम

(चित्र गूगल से साभार)