Sunday, 24 April 2016

मुकम्मल बादशाई चाहता हूँ


मिटाना हर बुराई चाहता  हूँ 
ज़माने की भलाई चाहता हूँ

तेरे दर तक रसाई चाहता हूँ
मैं  तुझसे आशनाई चाहता हूँ

लकीरों से नहीं हारा अभी मैं 
मुक़द्दर से लड़ाई  चाहता  हूँ

दिलों के दरमियाँ बढ़ती कुदूरत
मैं थोड़ी अब  सफाई चाहता हूँ

हुआ जाता हूँ मैं मुश्किल पसंदी
नहीं  अब  रहनुमाई  चाहता  हूँ

पलटकर  वार  करना  है  जरूरी
मैं अब  जोर आज़माई चाहता हूँ

तेरी खामोशियाँ खलने  लगी है
कहूँ क्या लब कुशाई चाहता हूँ

खुदा से और क्या माँगू भला मैं 
ग़मों  से कुछ  रिहाई चाहता हूँ

गदाई अब नहीं मंज़ूर हिमकर
मुकम्मल  बादशाई चाहता हूँ

© हिमकर श्याम

Friday, 8 April 2016

नूतन नवल उमंग

[नव संवत्सर और सरहुल पर दोहे ]

नव संवत्, नव चेतना, नूतन नवल उमंग।
साल पुराना ले गया, हर दुख अपने संग।।

चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा, वासन्तिक नवरात।
संवत्सर आया नया, बदलेंगे हालात।।

जीवन में उत्कर्ष हो, जन-जन में हो हर्ष।
शुभ मंगल सबका करे, भारतीय नव वर्ष।।


ढाक-साल सब खिल गए, मन मोहे कचनार।
वन प्रांतर सुरभित हुए, वसुधा ज्यों गुलनार।।

प्रकृति-प्रेम आराधना, सरहुल का त्योहार।
हरी-भरी धरती रहे, सुख-संपन्न घर बार।।

© हिमकर श्याम

(चित्र गूगल से साभार)



Thursday, 24 March 2016

भुला कर नफ़रतें सारी गले मिल यार होली में



भुला कर नफ़रतें सारी गले मिल यार होली में
मिटा दे अब दिलों की रंजिशें, तक़रार होली में

मिटे हर रंज दुनिया से, चमन गुलज़ार होली में
सभी  के  वास्ते  हो  खुशनुमा  संसार होली में

खिली सरसों, हँसे टेसू, पलाशी मन हुआ देखो
भरे है रंग कुदरत में बड़ा गुलकार होली में

नज़ारा है बड़ा दिलकश,  हवा में तैरती ख़ुशबू
पहन कर झूमता मंज़र गुलों का हार होली में

तुम्हारे बिन हैं फ़ीके रंग सारे  अब चले आओ
लिए बैठे हैं दिल में  हसरत ए  दीदार होली में

चढ़ी है फाग की मस्ती,  हिलोरे मारता है दिल
हैं बिखरे रंग खुशियों के सभी सरशार होली में

लिए हाथों में रंगों से भरी पिचकारियाँ  बच्चे
मचा हुड़दंग सड़कों पे,  सभी तैयार होली में

घुला है भंग मौसम में, खुमारी चढ़ गई सब पे
कि रहना मनचलों से यार तू  हुश्यार होली में

नहीं चढ़ता कोई भी रंग रंगा प्रीत में जो भी
मुझे  भी रंग अपने रंग में  दिलदार होली में

जला दो हर बुराई  होलिका  के साथ में  अबकी
बने हर आदमी अब साहब ए किरदार होली में

उदासी दूर हो सबकी, लबों पे हो हँसी 'हिमकर'
मुबारक़ हो सभी को रंग का त्योहार होली में


[सभी ब्लॉग विजिटर्स, संगी-साथियों, बंधु-बाँधवों
 और शुभचिंतकों को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ ]

© हिमकर श्याम