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Monday, 2 January 2017

नया साल आया, मुबारक घड़ी है


यकीनन नज़र में चमक आरज़ी है 
महज़ चार दिन की यहाँ चाँदनी है

जिधर  देखिए  हाय तौबा मची है
हथेली पे सरसों भला कब उगी है

चराग ए मुहब्बत बचायें  तो  कैसे
यहाँ नफ़रतों की हवा चल पड़ी है

फ़क़त आंकड़ों में नुमायाँ तरक्की
यहाँ मुफलिसी दर-बदर फिर रही है

कहाँ तितलियाँ हैं, हुए गुम परिंदे
फिज़ाओं में किसने ज़हर घोल दी है

उधर कोई बस्ती जलायी गई है
धुँआ उठ रहा है, ख़बर सनसनी है

चला छोड़ हमको ये बूढ़ा दिसम्बर
किसी अजनबी सा खड़ा जनवरी है

नईं हैं उमीदें, ख़ुशी का समाँ है  
नया साल आया, मुबारक घड़ी है 

नहीं रब्त बाकी बचा कोई हिमकर   
जहाँ दोस्ती थी, वहाँ दुश्मनी है

© हिमकर श्याम  



[तस्वीर : पुरातत्वविद डॉ हरेंद्र प्रसाद सिन्हा जी की ]



Wednesday, 1 January 2014

स्वागत करें हम नये साल का


अभिनंदन नव वर्ष  2014


उमंगों की डोली ले आया कहार
चुनर लाल ओढ़े खड़ा कोई द्वार

कनक रश्मियों में समायी है भोर
हुए स्वप्न पुलकित, हुआ मन विभोर
नयी भोर आयी है लेकर बहार

नयी धुन फिजाओं में बजने लगी
नयी आरज़ू है, नयी है ख़ुशी
उम्मीदों के रथ पर हुए सब सवार

सभी हों निरामय, सभी हो सुखी
मिटे आह पीड़ा, मिटे बेबसी
मिले अब सभी को सुकूनों करार

न होगा किसी का जड़ों से कटाव
रुकेगा नहीं अब नदी का बहाव
चहक नीड़ में हो, चमन में गुँजार

जहाँ में न नफरत का अब नाम हो
जुबाँ पर मुहब्बत का पैगाम हो
मिटे बैर दिल का,  मिटे हर दरार

चहूँ ओर माहौल है ज़श्न का
स्वागत करें हम नये साल का
चलो अपनी किस्मत को ले कुछ सँवार

-हिमकर श्याम
 









Sunday, 29 December 2013

शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो




व्यथित मन में मधु रस घोलो
शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

झोली में ले कर ख्वाब नया
देखो आया है साल नया
अरमानों की गठरी खोलो
शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

जो बीत गया सो बीत गया
वह दुःख का गागर रीत गया
उम्मीदों का दर फिर खोलो
शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

दूर नहीं खुशियों का प्याला
उस पार खड़ा है उजियाला
संग ज़माने के अब हो लो
शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

राह नयी है, लक्ष्य नया है
जीवन में संकल्प नया है
पहले अपने पर को तोलो
शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

क्या खोया, क्या पाया हमने
खूब हिसाब लगाया हमने
जख्म पुराने सारे धोलो
शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

छंद नया है, राग नया है
होठों पे फिर गीत नया है
सरगम के नव सुर पे डोलो
शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

पीड़ा- कष्ट मिटे जीवन का
पूरा हो सपना जन जन का
अंतर्मन के बंधन खोलो
शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो


 हिमकर श्याम