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Saturday, 31 October 2015

ज़िन्दगी दुश्वार लेकिन प्यार कर

मुश्किलों को हौसलों से पार कर
ज़िन्दगी दुश्वार लेकिन प्यार कर

सामने होती मसाइल इक नयी
बैठ मत जा गर्दिशों से हार कर

बात दिल में जो दबी कह दे उसे
इश्क़ है उससे अगर इज़हार कर

नफरतों का बीज कोई बो रहा
दोस्तों से यूँ न तू तक़रार कर

ढूंढता दिल चन्द खुशियों की घड़ी
अब ग़मों पर खुद पलट कर वार कर

दूर मंज़िल हैं अभी रस्ता कठिन
ज़िन्दगी की राह को हमवार कर

अपने ख़्वाबों की निगहबानी करो 
फायदा क्या ख़्वाहिशों को मार कर

है हमें लड़ना मुसलसल वक़्त से
हर घड़ी हासिल तज़ुर्बा यार कर


-हिमकर श्याम

(चित्र संयोजन : रोहित कृष्ण)