Monday, 4 February 2019

जीवन : तीन सेदोका


(एक)

रात अँधेरी
कान्तिमय दीपक
कंपित प्रज्वलित
खड़ा अकेला
सुख-दुःख संताप
लड़ना चुपचाप

(दो)

सृजन सीख
ठूंठ पर कोपल
दुःख पे सुख जय
आवाजाही है
पतझड़ वसंत
हंसते रोते जन

(तीन)

लघु जीवन
कंटकित डगर
कोशिशें बेअसर
व्यथित मन
हारे बैठे क्यूँ भला
सीखें जीने की कला


[सेदोका जापानी कविता की एक शैली है]

© हिमकर श्याम



(चित्र गूगल से साभार)




Sunday, 14 October 2018

विवशता



एक के बाद एक
फँसते जा रहे हैं हम
समस्याओं के,
दुर्भेद चक्रव्यूह में

चाहते हैं,
चक्रव्यूह से बाहर निकल,
मुक्त हो जाएँ हम भी
रोज प्रत्यंचा चढ़ जाती है,
लक्ष्य बेधन के लिए
लेकिन असमर्थताएँ
परास्त कर जाती हैं
हर तरफ से।

शायद-
हो गये हैं हम भी,
अभिमन्यु की तरह।
काश,
इससे निकलने का भेद भी
बतला ही दिया होता
अर्जुन ने ।

© हिमकर श्याम


(चित्र गूगल से साभार)

Thursday, 16 August 2018

हजारों रंग ख़ुशबू से बना गुलदान है भारत


हज़ारों रंग ख़ुशबू से  बना गुलदान है भारत
कई तहज़ीब,भाषा,धर्म की पहचान है भारत

कहीं गिरजा, कहीं मस्जिद, शिवाला और गुरुद्वारा
कभी होली कभी क्रिसमस कभी रमज़ान है भारत

कोई नफ़रत भी बोता तो पनपती है मोहब्बत ही
अज़ब जादू है माटी में, कोई वरदान है भारत

चलो मिलकर बचाएँ हम इसे फ़िरक़ापरस्ती से
न तेरा है, न मेरा है हमारी जान है भारत

नहीं पूरे हुए सपने, करे उम्मीद भी कब तक
मचलता है जो सीने में वही अरमान है भारत

इसे सींचा लहू देकर भगत अशफाक़ बिस्मिल ने
पुराणों वेद की धरती जहाँ की शान है भारत

ये वहशी दौर है 'हिमकर' नहीं महफ़ूज़ है कोई
हवाएँ  देख  नफ़रत की बहुत हैरान है भारत 

© हिमकर श्याम


(चित्र गूगल से साभार)