Thursday, 7 February 2019
Monday, 4 February 2019
जीवन : तीन सेदोका
(एक)
रात अँधेरी
कान्तिमय दीपक
कंपित प्रज्वलित
खड़ा अकेला
सुख-दुःख संताप
लड़ना चुपचाप
(दो)
सृजन सीख
ठूंठ पर कोपल
दुःख पे सुख जय
आवाजाही है
पतझड़ वसंत
हंसते रोते जन
(तीन)
लघु जीवन
कंटकित डगर
कोशिशें बेअसर
व्यथित मन
हारे बैठे क्यूँ
भला
सीखें जीने की कला
[सेदोका जापानी
कविता की एक शैली है]
© हिमकर श्याम
(चित्र गूगल से साभार)
Sunday, 14 October 2018
विवशता
एक के बाद एक
फँसते जा रहे हैं
हम
समस्याओं के,
दुर्भेद
चक्रव्यूह में
चाहते हैं,
चक्रव्यूह से
बाहर निकल,
मुक्त हो जाएँ हम
भी
रोज प्रत्यंचा चढ़
जाती है,
लक्ष्य बेधन के
लिए
लेकिन असमर्थताएँ
परास्त कर जाती
हैं
हर तरफ से।
शायद-
हो गये हैं हम भी,
अभिमन्यु की तरह।
काश,
इससे निकलने का भेद भी
बतला ही दिया
होता
अर्जुन ने ।
© हिमकर श्याम
(चित्र गूगल से साभार)
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