Friday, 20 March 2020

कोरोना का फोबिया


कोरोना का फोबिया, दिखता है चहुँओर।
ख़बरों में, अख़बार में, टीवी पर है शोर।।

सूक्ष्म वायरस ने किया, दुनिया को हलकान।
अफरा-तफरीे मची गई, सहमा है इंसान।।

हाथ मिलाना छोड़ कर, नमस्कार जोहार।
मास्क लगा कर घूमते, बड़े- बड़े बरियार।।

बंद स्कूल कॉलेज सब, मंद पड़ा बाजार।
फैल रहा है संक्रमण, मानव है लाचार।।

भूल गए सब देखिए, आपस की तकरार।
कोरोना के सामने, डाल दिए हथियार।।

जमाखोर तो लीन हैं, करने में व्यापार।
कोरोना के नाम पर, डर का कारोबार।।

भांति-भांति की भ्रांतियाँ, नुस्खे यहाँ हज़ार।
अपने-अपने स्वार्थ में, कुत्सित बुद्धि विचार।।

अफवाहों के जाल में, मत फँसिए श्रीमान।
घर बाहर हो स्वच्छता, रखिए इतना ध्यान।।

           © हिमकर श्याम

    (चित्र गूगल से साभार)


Wednesday, 22 May 2019

लिख रहे कैसी कहानी मुल्क में


लिख रहे कैसी कहानी मुल्क में
कर रहे जो हुक्मरानी मुल्क में

क़द्र खोती ये सियासत देखिए
आम होती बदजुबानी मुल्क में

मुफ़लिसी, बेरोजगारी बढ़ रही
रक़्स करती ख़ुश-गुमानी मुल्क में

अब भरोसा उठ गया है न्याय से
हाए इकतर्फ़ा बयानी मुल्क में

ख़ौफ़  का माहौल ऐसा बन गया
अब न होती हक़ बयानी मुल्क में

आँख से पट्टी हटा कर देखिए
क्या फ़ज़ाएँ शादमानी मुल्क में


कम नहीं हैं ज़ीस्त की दुश्वारियाँ  
आफ़तें कितनी उठानी मुल्क में

प्यार कितना है वतन से बोलिए
चाहिए इसकी निशानी मुल्क में

© हिमकर श्याम



(चित्र गूगल से साभार)



Monday, 1 April 2019

अप्रैल फूल


मूर्ख बने तो क्या हुआ, रखिए खुद को कूल।
हँसे-हँसाएँ आप हम, डे हैअप्रैल फूल।।

मूर्ख दिवस तो एक दिन, बनते हम सब रोज। 
मूर्खों की इस भीड़ में, महामूर्ख की खोज।। 

मूर्ख बना कर लोक को, मौज करे ये तंत्र ।। 
धोखा, झूठ, फ़रेब, छल, नेताओं के मंत्र।।


© हिमकर श्याम

(चित्र गूगल से साभार)