Tuesday, 10 October 2017

बात दिल की हमेशा सुना कीजिए


सामने   आप   मेरे   रहा   कीजिए
मुझको मुझसे न ऐसे जुदा कीजिए

है मुहब्बत अगर तो कहा कीजिए
बात दिल की हमेशा सुना कीजिए


क्या ख़ता है मेरी आप क्यूँ हैं ख़फ़ा
गर गिला हो कोई तो कहा कीजिए

कब बदल जाए नीयत किसी की यहाँ
हर किसी से न  हँस के मिला कीजिए

मैंने अहसास दिल का बयाँ कर दिया
यूँ  न  हैरत से मुझको  तका कीजिए
 



© हिमकर श्याम

(चित्र गूगल से साभार)
 

11 comments:

  1. Stunning story there. What occurred after?
    Take care!

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  2. दिनांक 17/10/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...

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  3. खूबसूरत गज़ल .

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  4. बहुत सादगी से कही गई सुंदर गज़ल ।

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  5. बहुत ही सुन्दर...

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  6. वाह्ह...बहुत सुंदर गज़ल।

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  7. है मुहब्बत अगर तो कहा कीजिए
    बात दिल की हमेशा सुना कीजिए
    ...वाह! बहुत खूब

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  8. कब बदल जाए नीयत किसी की यहाँ
    हर किसी से न हँस के मिला कीजिए
    ....बहुत ही सादगी से कही गई सुंदर गज़ल पसंद आई हिमकर जी गोवर्घन पूजा की शुभ कामनाएँ !!

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