Tuesday, 1 April 2014

अपना ही अक्स देख के हैरान आदमी





कितना बदल गया है ये, नादान आदमी
अपना ही अक्स देख के हैरान आदमी

इन्सानियत से दूर हैं इंसान आजकल
ईमान दीन बेच के शैतान आदमी

होता है रोज़-रोज़ मुसीबत से सामना
अपनी ही आदतों से परेशान आदमी

जाने कहाँ गयी वो कहकहो की महफिलें
फिर ढूंढता फिरे है वो मुस्कान आदमी

लिपटी हुई है शाम ये ख़ामोssशियों तले
किस बात से हुआ है पशेमान आदमी

हर तरफ बन गयी हैं ये नफ़रत की सरहदें
जाने कहाँ छिपा है मेहरबान आदमी

लड़ते हैं भाई-भाई सियासत के खेल में
क्यूं बन गया है हिन्दू-मुसलमान आदमी

बेबात जल रहीं हैं गरीबों की बस्तियाँ
दैरो-हरम के नाम पे हैवान आदमी

लब खोलना मना है, है सच बोलना मना
किसको सुनाये हाल है बेजान आदमी

दैरो-हरम : मंदिर-मस्जिद  

© हिमकर श्याम

(चित्र गूगल से साभार)

38 comments:

  1. बहुत खूब बहुत ही लाज़वाब अभिव्यक्ति आपकी। बधाई

    एक नज़र :- हालात-ए-बयाँ: ''मार डाला हमें जग हँसाई ने''

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    1. शुक्रिया आपका अभी जी…

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  2. हर तरफ बन गयी हैं ये नफ़रत की सरहदें

    जाने कहाँ छिपा है मेहरबान आदमी




    लड़ते हैं भाई-भाई सियासत के खेल में

    क्यूं बन गया है हिन्दू-मुसलमान आदमी




    बेबात जल रहीं हैं गरीबों की बस्तियाँ

    दैरो-हरम के नाम पे हैवान आदमी.......बहुत खूब आदरणीय!....यथार्थ को व्यक्त करती हुई पक्तियां....

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    1. आपका बहुत बहुत शुक्रिया...

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  3. आपके एक एक बात से सहमत हूँ
    उम्दा अभिव्यक्ति के लिए बधाई

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    1. हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया...

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  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, शनिवार, दिनांक :- 05/04/2014 को "कभी उफ़ नहीं की
    " :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1573
    पर.

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    1. राजीव जी, चर्चा मंच पर मेरी रचना लेने के लिए तहे दिल से शुक्रिया...

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  5. लड़ते हैं भाई-भाई सियासत के खेल में
    क्यूं बन गया है हिन्दू-मुसलमान आदमी
    बेबात जल रहीं हैं गरीबों की बस्तियाँ
    दैरो-हरम के नाम पे हैवान आदमी
    हिमकर भाई सुन्दर अहसास और यथार्थ को दर्शाती अभिव्यक्ति काश इंसान इंसा रहे ...
    भ्रमर ५

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    1. शुक्रिया आपका भ्रमर जी…

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  6. बहुत अच्छा लिखा है आपने। इन अशआरों में वर्तमान हालातों में आपकी सोच बेहतरीन लगी।

    लब खोलना मना है, है सच बोलना मना
    किसको सुनाएं हाल है बेजान आदमी

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    1. आपका बहुत बहुत शुक्रिया...

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  7. आज-कल के हालात पर चोट करती सुंदर रचना.

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    1. आपकी प्रतिक्रिया पाकर खुशी हुई...स्वागत है आपका ...

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  8. बहुत ही सुन्दर रचना आदरणीय धन्यवाद ! I.A.S.I.H ( हिंदी जानकारियाँ )
    हिंदी ब्लॉग जगत में एक नए ब्लॉग की शुरुवात हुई है कृपया आप सब से विनती है कि एक बार अवश्य पधारें , व अपना सुझाव जरूर रक्खें , धन्यवाद ! ~ ज़िन्दगी मेरे साथ - बोलो बिंदास ! ~ ( एक ऐसा ब्लॉग -जो जिंदगी से जुड़ी हर समस्या का समाधान बताता है )

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    1. आपकी प्रतिक्रिया पाकर खुशी हुई...स्वागत है आपका ...

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  9. लब खोलना मना है, है सच बोलना मना
    किसको सुनाये हाल है बेजान आदमी
    ..बहुत सटीक ..
    लाजवाब चित्र और उतनी ही अच्छी चिंतनशील प्रस्तुति ..

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    1. कविता जी, हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया...स्वागत है आपका...ब्लॉग से जुड़ने के लिए आभार...

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  10. क्या बात है। लाजवाब रचना।

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    1. आपकी प्रतिक्रिया पाकर खुशी हुई...स्वागत है आपका ...

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  11. बेबात जल रहीं हैं गरीबों की बस्तियाँ
    दैरो-हरम के नाम पे हैवान आदमी

    लब खोलना मना है, है सच बोलना मना
    किसको सुनाये हाल है बेजान आदमी

    बहुत बढ़िया

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    1. ग़ज़ल पसंद करने के लिए शुक्रिया...

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  12. BAHUT SUNDAR....KYA BAT!!!!!

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    1. आपकी प्रतिक्रिया पाकर खुशी हुई...स्वागत है आपका ...

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  13. होता है रोज़-रोज़ मुसीबत से सामना
    अपनी ही आदतों से परेशान आदमी
    लाजवाब शेर है हिमकर जी ... पूरी गज़ल नायाब नगीनों से सजी है ...
    बहुत उम्दा ...

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    1. शेर और ग़ज़ल को इनायत फरमाने के लिए शुक्रिया...

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  14. वाह... लाजवाब प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@भजन-जय जय जय हे दुर्गे देवी

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  15. हर तरफ बन गयी हैं ये नफ़रत की सरहदें
    जाने कहाँ छिपा है मेहरबान आदमी
    ....लाज़वाब...बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल...हरेक शेर बहुत उम्दा...

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  16. आपका बहुत बहुत शुक्रिया...

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  17. जाने कहाँ गयी वो कहकहो की महफिलें
    फिर ढूंढता फिरे है वो मुस्कान आदमी
    सच!

    बहुत उम्दा लिखा है!!

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  18. आपका बहुत बहुत शुक्रिया...

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  19. ☆★☆★☆



    हर तरफ बन गयी हैं ये नफ़रत की सरहदें
    जाने कहाँ छिपा है मेहरबान आदमी

    लड़ते हैं भाई-भाई सियासत के खेल में
    क्यूं बन गया है हिन्दू-मुसलमान आदमी

    वाह ! वाऽह…!


    पूरी ग़ज़ल अच्छी है
    आदरणीय हिमकर श्याम जी

    आपके ब्लॉग पर गीत दोहे भी पढ़े हैं
    श्रेष्ठ सुंदर छंदबद्ध सृजन के लिए साधुवाद !

    मंगलकामनाओं सहित...
    -राजेन्द्र स्वर्णकार


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    1. आप पहली बार ब्लॉग पर आये, स्वागत, आपकी टिप्पणी ने नई ऊर्जा भर दी. ब्लॉग से जुड़ने और अपना कीमती समय देने के लिए आभार व धन्यवाद

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  20. बढ़िया लिखा है.. शुभकामनाएं..

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    1. आपकी प्रतिक्रिया पाकर खुशी हुई...स्वागत है आपका ...

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