Sunday, 8 May 2016

रब से ऊपर होतीं माएँ


दिल की बातें पढ़तीं माएँ
दर्द भले हम लाख छुपाएँ

रहती हरदम साथ दुआएँ
हर लेती सब कष्ट बलाएँ

नाम कई एहसास वही है
इक जैसी होती सब माएँ

फ़ीके लगते चाँद सितारे
माँ के जैसा कौन बताएँ

सारी पीड़ा हँस के सहती
कर देती माँ माफ़ ख़ताएँ

माँ का रिश्ता सबसे प्यारा
रब  से  ऊपर होतीं माएँ

ममता का कोई मोल नहीं
कैसे माँ का क़र्ज़ चुकाएँ

© हिमकर श्याम

(तस्वीर और रेखाचित्र मेरे भाँजे अंशुमान आलोक की)

15 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना ।

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  2. माँ से बढ़ कर कुछ नहीं है .बहुत सुंदर ।

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (10-05-2016) को "किसान देश का वास्तविक मालिक है" (चर्चा अंक-2338) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. माँ होती है सबसे अच्छी
    उससे अच्छा कौन बतायें।

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  5. नाम कई एहसास वही है
    इक जैसी होती सब माएँ
    ...बहुत सुन्दर और भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

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  6. नाम कई एहसास वही है
    इक जैसी होती सब माएँ
    umda rachna :)

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  7. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार!

    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...

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  8. मां का दर्जा सबसे ऊंचा होता है। यह सोलह आने सच्‍ची बात है। हमें यह बताया जाता है कि मां के पैरों के नीचे जन्‍नत होती है। इसलिए हमें कभी उसे दुख नहीं पहुंचाना चाहिए।

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  9. बेहद सुंदर रचना। रब क्या है ये भी सिखाती माँएं।

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  10. बहुत सुन्दर

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  11. माँ माँ होती है ... जितना भी कहा जाए कम है उसके बारे में ...
    नमन है माँ को ...

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  12. बेहद सुंदर रचना :)

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