@ उदय जी, हार्दिक आभार @ अल्पना जी, आपकी प्रतिक्रियाएं उत्साह बढ़ातीं हैं. स्नेह बनाएं रखें. @ संजय जी, शुक्रिया @ दिगंबर नासवा जी, आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर प्रसन्नता हुई. हार्दिक आभार @ रीना जी, सुझाव भरी प्रतिक्रिया और ब्लॉग से जुड़ने के लिए हार्दिक आभार. @ राजीव जी, बहुत बहुत धन्यवाद @ धन्यवाद पुष्कर @ कैलाश जी, सराहना और ब्लॉग से जुड़ने के लिए धन्यवाद @ धीरेन्द्र जी, आभार
झांकिए, दिल में एक बार
ReplyDeleteवहीं दोस्त नजर आएगा.....उम्दा रचना बधाई ....उदय
अहसासों को बखूबी पिरोया है इस कविता में.
ReplyDeleteअच्छी लगी यह रचना.
जीवन की आपाधापी में
ReplyDeleteबिखर गयीं सारी कड़ियां
...लाज़वाब....सकारात्मक सोच लिए बहुत उत्कृष्ट अभिव्यक्ति...
बहुत खूब ... दिल में झांकना जरूरी है कुछ पल को रुकना जरूरी है अपनों को खोजना जरूरी है ...
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर रचना....
ReplyDelete:-)
आप अपने ब्लॉग पर फॉलोवर्स का आप्शन लगाइये ..
ReplyDeleteजिससे हमें समय समय पर आपके रचनाओ कि जानकारी मिलती रहेगी.
Bhut khub..
ReplyDeleteबसंत पंचमी कि हार्दिक शुभकामनाएँ आपको....
ReplyDeletehttp://mauryareena.blogspot.in/
:-)
जीवन की आपाधापी में
ReplyDeleteबिखर गयीं सारी कड़ियां
खोलिए, अतीत के द्वार
गुजरा दौर नजर आएगा
....बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...
लाजबाब। बहुत उम्दा अभिव्यक्ति ।
ReplyDelete@ उदय जी, हार्दिक आभार
ReplyDelete@ अल्पना जी, आपकी प्रतिक्रियाएं उत्साह बढ़ातीं हैं. स्नेह बनाएं रखें.
@ संजय जी, शुक्रिया
@ दिगंबर नासवा जी, आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर प्रसन्नता हुई. हार्दिक आभार
@ रीना जी, सुझाव भरी प्रतिक्रिया और ब्लॉग से जुड़ने के लिए हार्दिक आभार.
@ राजीव जी, बहुत बहुत धन्यवाद
@ धन्यवाद पुष्कर
@ कैलाश जी, सराहना और ब्लॉग से जुड़ने के लिए धन्यवाद
@ धीरेन्द्र जी, आभार
Bahoot khoob
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