Tuesday, 21 October 2014
Saturday, 11 October 2014
कोई जादू लगे है ख़यालात भी
खूब होती शरारत मेरे साथ भी
सब्र को अब मिले कोई सौगात भी
रंजिशे और नफरत भुला कर सभी
हो कभी दिल से दिल की मुलाक़ात भी
है बला की कशिश और लज़्ज़त जुदा
कोई जादू लगे है ख़यालात भी
फ़ासले अब मिटें, बंदिशें सब हटें
प्यार की छांव में बीते दिन-रात भी
है लबों पे दुआ गर सुनो तुम सदा
हो अयाँ आंखों से दिल के जज़्बात भी
चाहतों से महकता रहे सहने दिल
हम पे रहमत करे अब ये बरसात भी
दूर रख इन ग़मों को चलो कुछ हँसे
वक़्त के साथ बदलेंगे हालात भी
अयाँ: जाहिर, सहन: आँगन
© हिमकर श्याम
(चित्र गूगल से साभार)
सब्र को अब मिले कोई सौगात भी
रंजिशे और नफरत भुला कर सभी
हो कभी दिल से दिल की मुलाक़ात भी
है बला की कशिश और लज़्ज़त जुदा
कोई जादू लगे है ख़यालात भी
फ़ासले अब मिटें, बंदिशें सब हटें
प्यार की छांव में बीते दिन-रात भी
है लबों पे दुआ गर सुनो तुम सदा
हो अयाँ आंखों से दिल के जज़्बात भी
चाहतों से महकता रहे सहने दिल
हम पे रहमत करे अब ये बरसात भी
दूर रख इन ग़मों को चलो कुछ हँसे
वक़्त के साथ बदलेंगे हालात भी
अयाँ: जाहिर, सहन: आँगन
© हिमकर श्याम
(चित्र गूगल से साभार)
Saturday, 13 September 2014
हिंदी अपनी शान हो
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