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Monday, 4 February 2019

जीवन : तीन सेदोका


(एक)

रात अँधेरी
कान्तिमय दीपक
कंपित प्रज्वलित
खड़ा अकेला
सुख-दुःख संताप
लड़ना चुपचाप

(दो)

सृजन सीख
ठूंठ पर कोपल
दुःख पे सुख जय
आवाजाही है
पतझड़ वसंत
हंसते रोते जन

(तीन)

लघु जीवन
कंटकित डगर
कोशिशें बेअसर
व्यथित मन
हारे बैठे क्यूँ भला
सीखें जीने की कला


[सेदोका जापानी कविता की एक शैली है]

© हिमकर श्याम



(चित्र गूगल से साभार)