मन में हो संकल्प तो, कुछ भी नहीं अलक्ष्य।
उठो, चलो, आगे बढ़ो, पा लोगे तुम लक्ष्य।।
जीव-जीव में शिव बसे, मानवता ही धर्म।
सिखाया एक संत ने जनसेवा का कर्म।।
राष्ट्र प्रेम की भावना, सत्कर्मों की लीक।
सर्व धर्म सद्भाव का, दूजा नहीं प्रतीक।।
स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन!!
© हिमकर श्याम
(चित्र गूगल से साभार)
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