त्वं जीव शरदः सहस्रम्
 |
चाँद-तारों ने तुमको गगन से निहारा
मंगलमय हो जन्मदिन अक्षिता तुम्हारा
हरपल हँसती रहो तुम, मुस्कुराती रहो
आँगन में पंछियों सी, चहचहाती रहो
तुमसे सुरभित हुआ है, मन उपवन सारा
तुम दिव्य वृन्दावन सी, घर गोकुल हमारा
तुम कान्हा की मुरली, यमुना की धारा
तुमहीं हमारी खुशियाँ, सुख चैन हमारा
© हिमकर श्याम
|
[हमारी प्यारी बिटिया (भतीजी) अक्षिता सुदिति (कीर्ति) का प्रथम जन्मदिन 22-11-2014 को था. बिटिया के लिए एक छोटी सी कविता लिखी थी, आज पोस्ट कर रहा हूँ. आप सब भी बिटिया अक्षिता को अपना स्नेहिल आशीर्वाद दें]