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Sunday, 8 May 2016

रब से ऊपर होतीं माएँ


दिल की बातें पढ़तीं माएँ
दर्द भले हम लाख छुपाएँ

रहती हरदम साथ दुआएँ
हर लेती सब कष्ट बलाएँ

नाम कई एहसास वही है
इक जैसी होती सब माएँ

फ़ीके लगते चाँद सितारे
माँ के जैसा कौन बताएँ

सारी पीड़ा हँस के सहती
कर देती माँ माफ़ ख़ताएँ

माँ का रिश्ता सबसे प्यारा
रब  से  ऊपर होतीं माएँ

ममता का कोई मोल नहीं
कैसे माँ का क़र्ज़ चुकाएँ

© हिमकर श्याम

(तस्वीर और रेखाचित्र मेरे भाँजे अंशुमान आलोक की)

Saturday, 10 May 2014

माँ


-चित्र गूगल से साभार-



 (मातृ-दिवस पर)

 सर्दियों के मौसम की नर्म धूप लगे माँ
सहनशीलता, त्याग का प्रतिरूप लगे माँ
तपती दुपहरी में शीतल बयार लगे माँ
इंद्र वाटिका का धवल हरसिंगार लगे माँ
सुहागिन के माथे सजा सिंदूर लगे माँ
पूजा की थाली का अक्षत, दूब लगे माँ
व्रती के हाथों का पावन सूप लगे माँ
बिन तीरथ व धाम की देवी रूप लगे माँ
बुझी अंगीठी में आशा की फूँक लगे माँ
कोंपलों से उठी खुशियों की कूक लगे माँ
मरु विस्तार में नेह का अनुबंध लगे माँ
मन से मन को पाटती, सेतुबंध लगे माँ
निखरी चाँदनी में चंदा का प्यार लगे माँ
निर्मल, निश्छल ममता का उद्गार लगे माँ
सारे अरमानों की एक रहगुज़र लगे माँ
हमें दुआओं का अथाह समुन्दर लगे माँ


माँ

© हिमकर श्याम