सर्दियों के मौसम की नर्म
धूप लगे माँ
सहनशीलता, त्याग का
प्रतिरूप लगे माँ
तपती दुपहरी में शीतल बयार
लगे माँ
इंद्र वाटिका का धवल हरसिंगार
लगे माँ
सुहागिन के माथे सजा सिंदूर
लगे माँ
पूजा की थाली का अक्षत, दूब
लगे माँ
व्रती के हाथों का पावन सूप
लगे माँ
बिन तीरथ व धाम की देवी
रूप लगे माँ
बुझी अंगीठी में आशा की फूँक
लगे माँ
कोंपलों से उठी खुशियों
की कूक लगे माँ
मरु विस्तार में नेह का
अनुबंध लगे माँ
मन से मन को पाटती,
सेतुबंध लगे माँ
निखरी चाँदनी में चंदा का
प्यार लगे माँ
निर्मल, निश्छल ममता का उद्गार
लगे माँ
सारे अरमानों की एक रहगुज़र
लगे माँ
हमें दुआओं का अथाह समुन्दर
लगे माँ
माँ
© हिमकर श्याम