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Wednesday, 21 October 2015

विजय पर्व पर कीजिए, पापों का संहार


जगत जननी जगदम्बिकासर्वशक्ति स्वरूप।
दयामयी दुःखनाशिनीनव दुर्गा नौ रूप।। 
शक्ति पर्व नवरात्र मेंशुभता का संचार।
भक्तिपूर्ण माहौल सेहोते शुद्ध विचार ।। 
जयकारे से गूंजतादेवी का दरबार।
माता के हर रूप कोनमन करे संसार।।
माँ अम्बे के ध्यान सेमिट जाते सब कष्ट।
रोग शोक संकट सभीहो जाते हैं नष्ट।।


कामक्रोधमदमोहछलअन्यायअहंकार।
रावण की सब वृत्तियाँमन के विषम विकार।।
विजय पर्व पर कीजिएपापों का संहार।
रावण भीतर है छुपाकरिए उस पर वार।। 

[दुर्गा पूजा, विजयादशमी और दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएँ]


©हिमकर श्याम 


(चित्र गूगल से साभार)





Saturday, 28 March 2015

सबके दाता राम


रघुकुल में पैदा हुएजग के पालनहार।
कौशल्या हर्षित हुईधन्य हुआ संसार।।

कण-कण में जो हैं बसेपावन जिनका नाम।
पीड़ा हरने आ गएसबके दाता राम।।

राम जन्म की धूम है, चहूँ ओर उल्लास
राम दया अनुराग हैं, राम भक्ति विश्वास।

 मर्यादा आदर्श केरघुवर हैं प्रतिरूप।
धीरजधरमत्याग व तपराम चरित के रूप।।

बनते बिगड़े काम सब, निर्बल के बल राम
राम नाम सबसे बड़ा, राम चरण सुख धाम।।
  
रामनवमी की शुभकामनाएँ!!

© हिमकर श्याम

(चित्र गूगल से साभार)