Showing posts with label उम्मीदें. Show all posts
Showing posts with label उम्मीदें. Show all posts

Monday, 2 January 2017

नया साल आया, मुबारक घड़ी है


यकीनन नज़र में चमक आरज़ी है 
महज़ चार दिन की यहाँ चाँदनी है

जिधर  देखिए  हाय तौबा मची है
हथेली पे सरसों भला कब उगी है

चराग ए मुहब्बत बचायें  तो  कैसे
यहाँ नफ़रतों की हवा चल पड़ी है

फ़क़त आंकड़ों में नुमायाँ तरक्की
यहाँ मुफलिसी दर-बदर फिर रही है

कहाँ तितलियाँ हैं, हुए गुम परिंदे
फिज़ाओं में किसने ज़हर घोल दी है

उधर कोई बस्ती जलायी गई है
धुँआ उठ रहा है, ख़बर सनसनी है

चला छोड़ हमको ये बूढ़ा दिसम्बर
किसी अजनबी सा खड़ा जनवरी है

नईं हैं उमीदें, ख़ुशी का समाँ है  
नया साल आया, मुबारक घड़ी है 

नहीं रब्त बाकी बचा कोई हिमकर   
जहाँ दोस्ती थी, वहाँ दुश्मनी है

© हिमकर श्याम  



[तस्वीर : पुरातत्वविद डॉ हरेंद्र प्रसाद सिन्हा जी की ]



Thursday, 1 January 2015

हर किसी को दुआएँ नए साल में


अपने गम को भुलाएँ, नए साल में 
आप हम मुस्कुराएँ, नए साल में 

बेबसी का रहे अब न नामों निशाँ
दूर हों सब बलाएँ, नए साल में 

ज़िन्दगी पर भरोसा सलामत रहे 
फिर उम्मीदें जगाएँ, नए साल में 

रंग, ख़ुशबू मिले, फूल, तितली हँसे
ख़ुशनुमा हों फिज़ाएँ, नए साल में 

खौफ़, वहशत मिटे, यूँ न अस्मत लुटे
हों न आहत दिशाएँ, नए साल में

मज़हबी रंज़िशें बढ़ रहीं देखिए  
बात बिगड़ी बनाएँ, नए साल में 

क्यों अंधेरे में डूबी हुई बस्तियाँ 
जो हुआ सो भुलाएँ, नए साल में 

रो रही है धरा, देख आबोहवा 
चल धरा को हँसाएँ, नए साल में

थी नदी एक यहाँ पर, जहाँ हम खड़े 
वो नदी ढूंढ़ लाएँ, नए साल में 

फ़र्क हिमकर नहीं, गैर अपने सभी     
हर किसी को दुआएँ, नए साल में

नूतन वर्ष आपके और आपके अपनों के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति, प्रसन्नता, सफ़लता और आरोग्य  लेकर आए...नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...

© हिमकर श्याम 

(चित्र गूगल से साभार)